शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित

हिन्दू धर्म शास्त्रों में “शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित” का भक्ति पूर्वक किया गया पाठ, भगवान शिव के कृपा पाने का सबसे सरल तरीका माना गया है। यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक संस्कृत स्तोत्र है, जो पाँच अक्षरों के महामंत्र “नमः शिवाय” पर आधारित है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र में कुल 6 श्लोक हैं, जिनमें पहले 5 श्लोक क्रमशः ‘न’ ‘म’ ‘शि’ ‘वा’ और ‘य’ अक्षरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान शिव से सम्बंधित ये पांचों अक्षर ब्रह्मांड की पाँच शक्तियों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतीक माना गया है। इस स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक शिव के विशिष्ट स्वरूप और गुणों का वर्णन करता है।

संस्कृत में लिखा गया आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र छोटा जरूर है, परन्तु इसके अर्थ को समझकर पढ़ने से आप इसके अद्भुत लाभ को प्राप्त कर सकते हैं।

आज के इस ब्लॉग पोस्ट में मैं आपके साथ “शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित” साझा कर रहा हूँ। साथ हीं आप जानेंगे इस श्लोक की सही पाठ विधि क्या है और इसे पढ़ने के कौन कौन से लाभ हैं। यहाँ आपको इस स्तोत्र का एक आकर्षक PDF भी मिलेगा ताकि आप इसे सेव करके रोज इसका लाभ ले सकें।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

जो भी मनुष्य “शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित” का पाठ नियमित रूप से प्रतिदिन या प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि या प्रदोष के दिन करता है, उसके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, कष्ट और भय दूर हो जाती है, मन को शांति मिलती है तथा जीवन में शुभता का प्रादुर्भाव होता है।

तो आइए, शिवजी की उपासना में मन लगाएँ और उनको समर्पित इस पंचाक्षर मंत्र से अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से भर दें। भोलेनाथ आप पर अपनी कृपा बनाए रखें।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित

भगवान शिव का पंचाक्षरी महामंत्र “नमः शिवाय” केवल पाँच अक्षरों का है, लेकिन इसमें पूरे ब्रह्मांड की शक्ति निहित है। इन्हीं पाँच अक्षरों की महिमा का गुणगान करता है आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ये “शिव पंचाक्षर स्तोत्र”।

अक्सर भक्त केवल श्लोक पढ़ लेते हैं, लेकिन जब वही स्तोत्र अर्थ सहित पढ़ा जाए, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। क्योंकि अर्थ समझने से हर श्लोक का भाव हृदय में गहराई से उतरता है।

तो चलिए, अब हम शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित पाठ करते हैं, जहाँ आपको प्रत्येक श्लोक के साथ उसका सरल और स्पष्ट अर्थ भी मिलेगा। आइए, मिलकर इस दिव्य स्तोत्र को समझें और भोलेनाथ के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करें।

॥ शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै ‘न’ काराय नमः शिवाय ॥१॥

अर्थ: जो अपने कंठ में नागों के राजा को हार की तरह धारण करते हैं, जिनके तीन नेत्र हँ, जिनके शरीर पर भस्म (विभूति) का श्रृंगार है, जो आकाशरूपी वस्त्र को धारण करते हैं अर्थात दिशा ही जिनका वस्त्र है, उन शाश्वत, अनादि और पूर्णतः शुद्ध महेश्वर कारस्वरूप शिव को नमस्कार है ॥ १॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै ‘म’ काराय नमः शिवाय ॥२॥

अर्थ: मन्दाकिनी अर्थात गंगा के जल और चन्दन से जिनका अभिषेक किया जाता है, मंदार के पुष्पों तथा अन्य अनेक पुष्पों से जिनकी सुंदर पूजा की जाती है, उन नन्दी के अधिपति, प्रथम गणों के स्वामी, महेश्वर “म* कारस्वरूप शिव को नमस्कार है ॥ २॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै ‘शि’ काराय नमः शिवाय ॥३॥

अर्थ: जो कल्याण स्वरूप हैं, माता पार्वती के मुखकमल को प्रसन्न करने के लिये जो सूर्य स्वरूप हैं, जो दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले हैं, जिनकी ध्वज में वृषभ (बैल) का चिन्ह है, उन शोभायमान नीले कंठ वाले “शि ‘कारस्वरूप शिव को नमस्कार है ॥ ३॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय,
तस्मै ‘व’ काराय नमः शिवाय ॥४॥

अर्थ: ऋषि वशिष्ठ, अगस्त्य, गौतम, तथा अन्य आर्य मुनियों के द्वारा और इन्द्र आदि देवताओं के द्वारा जिनके मस्तक का पूजन किया जाता है, चन्द्रमा, सूर्य ओर अग्नि जिनके नेत्र हैं, उन ‘व’ कारस्वरूप शिव को नमस्कार है ॥ ४॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै ‘य’ काराय नमः शिवाय ॥५॥

अर्थ: जो स्वयं यज्ञ के रूप हैं, जो जटाधारी है, जिनके हाथ में पिनाक अर्थात धनुष है, जो शाश्वत और अनादि हैं, जो दिव्य स्वरूप वाले हैं, उन दिगम्बर देव ‘य’ कारस्वरूप शिव को नमस्कार है ॥५॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।
शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥६॥

अर्थ: जो व्यक्ति भगवान् शिव के समीप पाँच अक्षरों वाले इस पवित्र पञ्चाक्षरस्तोत्र का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है तथा वहां शिवजी के साथ आनंद का अनुभव करता है ॥ ६॥

॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं शिवपचाक्षरस्तोतरं सम्पूर्णम्‌ ॥

शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित

शिव पंचाक्षर स्तोत्र PDF

शिव पंचाक्षर स्तोत्र आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत सरल परन्तु उतना हीं शक्तिशाली स्तोत्र है, जो ‘ॐ नमः शिवाय’ पंचाक्षर मंत्र की महिमा का वर्णन करता है। इस स्तोत्र को अगर आस्था तथा नियमपूर्वक पढ़ते हैं, तो आप निश्चय हीं अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और शिव कृपा का अनुभव करेगें।

कई लोग चाहते हैं कि उन्हें इस स्तोत्र का PDF प्रारूप मिल जाए, ताकि मोबाइल, लैपटॉप या प्रिंट निकालकर इसे कहीं भी पढ़ सकें।

चाहे आप मंदिर में हों, यात्रा कर रहे हों या घर पर पूजा कर रहे हों – PDF से पढ़ना बहुत ही आसान और सुविधाजनक है।

यहाँ हम आपके साथ शिव पंचाक्षर स्तोत्र PDF लिंक को साझा करने वाले हैं। नीचे दिए गए लिंक से आप आसानी से शिव पंचाक्षर स्तोत्र PDF को डाउनलोड कर सकते हैं।

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शिव पंचाक्षर स्तोत्र पढ़ने की विधि

शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र “नमः शिवाय” की महिमा को समर्पित एक सरल और अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है।

यहाँ हम ये जानेंगे कि “शिव पंचाक्षर स्तोत्र पढ़ने की सरल, प्रभावी और शास्त्रोक्त विधि” क्या है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र पढ़ने की विधि

प्रातःकाल उठकर स्नानादि से निवृत हो साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पवित्र मन से शिव की पूजा के लिए तैयार हों।

यदि घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित हों तो उसके समक्ष बैठें, अन्यथा शिव जी की कोई तस्वीर अपने समक्ष रखें। सनातन धर्म में उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। अतः संभव हो तो इसी दिशा का चुनाव करें।

अब सर्वप्रथम शिवलिंग या शिवजी के चित्र के सामने दीपक (घी का या तेल का) और धूप जलाएं।

संभव हो तो शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल आदि चढ़ाएं। यह करने से पाठ का फल और भी बढ़ जाता है।

अब पूरे शांत मन से श्रद्धा के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का स्मरण करते हुए शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ आरम्भ करें।

अगर आप “शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित” पढ़ रहे हैं, तो हर श्लोक के बाद उसका अर्थ भी मन में ग्रहण करें। इससे पाठ का प्रभाव और गहरा होता है।

पाठ पूरा होने के बाद भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूर्ति और कल्याण की प्रार्थना करें।

किसी भी सोमवार या शुभ दिन से “शिव पंचाक्षर स्तोत्र” का पाठ आरम्भ किया जा सकता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र के फायदे

हिन्दू शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है कि भगवान् शिव को समर्पित आदि शंकराचार्य कृत “शिव पंचाक्षर स्तोत्र” का पाठ करने से साधक के जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है। यह स्तोत्र इतना शक्तिशाली है कि इसके पाठ मात्र से हीं पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ हीं समस्त प्रकार के भय से भी व्यक्ति दूर हो जाता है।

जो मनुष्य प्रतिदिन या फिर किसी विशेष अवसरों पर भी इसे श्रद्धा से पढ़ते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं और वो शिव कृपा को सहज ही प्राप्त कर लेता है।

अब आइए विस्तार से जानते हैं कि शिव पंचाक्षर स्तोत्र के फायदे कौन-कौन से हैं और क्यों इसे पढ़ना हर शिव भक्त के लिए जरूरी माना गया है।

मिलती है रोगों से मुक्ति

शिवजी को इस पृथ्वी लोक का देवता कहा गया है, जिनका एक नाम पशुपतिनाथ भी है। अर्थात शिवजी जी इस ब्रह्माण्ड के समस्त जीवों के स्वामी हैं। श्रद्धापूर्वक शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से भगवान् शिव अपने भक्त के समस्त शारीरिक और मानसिक रोगों को समाप्त कर देते हैं।

भय और कष्टों का होता है नाश

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पूर्ण श्रद्धा से किया गया पाठ व्यक्ति को भय, दुख और समस्त संकटों से दूर रखता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ साधक के भीतर आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाता है।

सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार

शिव पंचाक्षर स्तोत्र के नियमित पाठ से मानसिक अशांति दूर होती है और साधक के भीतर धीरे-धीरे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।

घर-परिवार में आती है सुख-शांति

भगवान् शिव का एक नाम अर्धनारीश्वर भी है, अर्थात जो सदा माँ पार्वती के साथ निवास करते हैं। अगर व्यक्ति अपने पूरे परिवार के साथ मिलकर इस स्तोत्र का पाठ करता है तो घर में सुख-शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव शीघ्र हीं बढ़ने लगता है।

मनोकामना होती है पूर्ण

शीघ्र हीं प्रसन्न हो जाने वाले आशुतोष भगवान् शंकर इस शिव पंचाक्षर स्तोत्र के पाठ से अपने भक्त की सभी मनोकामना शीघ्र पूर्ण कर देते हैं।

होती है आध्यात्मिक और भौतिक उन्नति

“ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र के माध्यम से भक्त एक साथ शिव और शक्ति दोनों की आराधना कर लेता है, अतः साधक को भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों हीं प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

शिवलोक की होती है प्राप्ति

पंचाक्षर स्तोत्र का एक बार भी श्रद्धा से पाठ करना पुण्यदायी माना गया है। पापों का क्षय करने वाला ये शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ साधक को शिवलोक की प्राप्ति कराता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र FAQ

शिव पंचाक्षर स्तोत्र किसने लिखा है?

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का रचईता आदि शंकराचार्य को माना जाता है। इस स्तोत्र के माध्यम से उन्होंने ‘नमः शिवाय’ पंचाक्षर मंत्र की महिमा का वर्णन किया है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

इसे प्रातःकाल स्नान के बाद, सोमवार के दिन, शिवरात्रि, प्रदोष या शिवजी से सम्बंधित अन्य किसी व्रत के दिन पढ़ना सबसे शुभ माना जाता है। हालांकि इसे कभी भी श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है।

क्या शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित पढ़ना जरूरी है?

हाँ, अर्थ सहित पढ़ने से हर श्लोक का भाव स्पष्ट हो जाता है जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होता है?

इसके नियमित पाठ से भय दूर होता है, मानसिक शांति मिलती है, घर-परिवार में सुख-शांति रहती है और साधक को शिव कृपा सहज ही प्राप्त हो जाती है।

क्या महिलाएँ शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?

 बिल्कुल, यह स्तोत्र सभी के लिए है। महिलाएँ और पुरुष दोनों ही श्रद्धा और नियम से इसका पाठ कर सकते हैं।

निष्कर्ष

6 श्लोकों के “शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित” का पाठ आज के व्यस्त जीवन में शिवजी की कृपा पाने का सबसे आसान तरीका है। हिन्दू दर्शन और शास्त्रों में ऐसा उल्लेख है की शिव पंचाक्षर स्तोत्र का नियमित पाठ से मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि, तनाव में कमी और शरीर में आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है।

यदि आप इस स्तोत्र को हमेशा अपने पास रखना चाहते हैं, तो शिव पंचाक्षर स्तोत्र PDF डाउनलोड करके रोजाना इसका पाठ कर सकते हैं।

उम्मीद करता हूँ कि आप सभी पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित रूप से शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ कर भोलेनाथ की कृपा का भागी बनेगें।

अमृत वचन:
“इस स्तोत्र की सबसे बड़ी शक्ति है इसकी सरलता।
क्योंकि एक बच्चा भी इसे पढ़ सकता है, और एक योगी भी इसकी गहराई में खो सकता है।”

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